ॐ
होम/हमारा परिचय

हमारा परिचय

सनातन स्वराज सेवा ट्रस्ट

✦सनातन स्वराज क्या है?✦

सनातन स्वराज केवल एक संस्था या अभियान नहीं, बल्कि एक विचार है — धर्म को जीवन से जोड़ने का, संस्कारों को समाज से जोड़ने का और सेवा को मानवता से जोड़ने का।

हमारा विश्वास है कि जब धर्म, सेवा और संस्कार एक साथ चलते हैं, तब समाज का सच्चा उत्थान होता है। इसीलिए हम शिक्षा, स्वास्थ्य, गौ सेवा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य करते हैं।

धर्म
सेवा
संस्कार
शिक्षा
सामाजिक उत्थान
सनातन स्वराज क्या है?

✦हमारा उद्देश्य✦

सेवा, संस्कार, संस्कृति और धर्म के माध्यम से समाज में जागरूकता एवं सकारात्मक परिवर्तन लाना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। सनातन धर्म के मूल्यों, भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन-दर्शन के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए हम शिक्षा, स्वास्थ्य, पारिवारिक संस्कार, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, गौसेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए निरंतर कार्य करते हैं।

हमारा प्रयास अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और देखभाल, खेल एवं युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, मंदिर एवं धार्मिक स्थलों के निर्माण व संरक्षण, कन्या विवाह जैसे सामाजिक कार्यों, सड़क एवं जनसुविधा से जुड़े कार्यों तथा पशु-पक्षी सेवा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सेवा पहुँचाना है। हमारा संकल्प है कि धर्म और संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहते हुए सेवा, शिक्षा और संस्कार के माध्यम से एक सशक्त, आत्मनिर्भर, संवेदनशील और संस्कारित समाज का निर्माण किया जाए।

धार्मिक जागरूकता

धर्म के प्रति जन-जागरण एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रसार।

स्वास्थ्य सहायता

जरूरतमंदों को चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य शिविर और उपचार सहयोग।

गौ एवं पशु सेवा

गौशाला, पशु-पक्षी सेवा, भोजन एवं चिकित्सा का प्रबंध।

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, रोजगार, सुरक्षा और जागरूकता।

पर्यावरण संरक्षण

वृक्षारोपण, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता।

सामाजिक सहायता

जरूरतमंद परिवारों की सहायता, सामुदायिक सहयोग और सामाजिक उत्थान।

✦हमारी विचारधारा✦

धर्म

धर्म हमारी पहचान है। धर्म ही समाज को दिशा देता है। हम धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संस्कार

संस्कार हमारी नींव है। संस्कार ही परिवार को संस्कृति से जोड़ता है। हम संस्कार के संरक्षण में समर्पित हैं।

सेवा

सेवा हमारी साधना है। सेवा ही जीवन की सार्थकता है। हम निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं।

✦हमारा दृष्टिकोण✦

धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर पहलू में धर्म का साहचर्य और जीवन-मूल्यों से जुड़ाव हमारा दृष्टिकोण है।

धर्म

हमारा आधार और पहचान

संस्कार

गुणों और संस्कृति का संरक्षण

सेवा

निस्वार्थ कर्म

समाज

सामूहिक उत्थान

राष्ट्र

समृद्ध और गौरवशाली राष्ट्र

✦हमारे प्रमुख कार्यक्षेत्र✦

धर्म जागरण
शिक्षा सहायता
स्वास्थ्य सहायता
गौ एवं पशु सेवा
महिला सशक्तिकरण
पर्यावरण संरक्षण
आवासीय सहायता
रक्तदान अभियान
सामाजिक जागरूकता
सामाजिक सुरक्षा
सांस्कृतिक कार्यक्रम
युवा जागृति
ॐ

हमारा संकल्प

संस्कृति से सेवा तक • संस्कार से समाज तक

धर्मसेवासंस्कारशिक्षासामाजिक उत्थान
ॐ
❧गीता संदेश☙

अर्जुन उवाच अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः। कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति॥

— श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 4, श्लोक 4

❧भावार्थ:☙

आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है; अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था - यह बात मैं कैसे समझूँ?

Gita Illustration
ॐ
❧गीता संदेश☙

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान् मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्॥

— श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 4, श्लोक 18

❧भावार्थ:☙

जो मनुष्य कर्ममें अकर्म देखता है और जो अकर्ममें कर्म देखता है, वह मनुष्योंमें बुद्धिमान् है,  योगी है और सम्पूर्ण कर्मोंको करनेवाला  है।

Gita Illustration
ॐ
❧गीता संदेश☙

बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्याऽऽत्मानं नियम्य च॥18.51॥

— श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 18, श्लोक 51

❧भावार्थ:☙

जो विशुद्ध (सात्त्विकी) बुद्धिसे युक्त, वैराग्यके आश्रित, एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक इन्द्रियोंका नियमन करके, शरीर-वाणी-मनको वशमें करके, शब्दादि विषयोंका त्याग करके और राग-द्वेषको छोड़कर निरन्तर ध्यानयोगके परायण हो जाता है, वह अहंकार, बल, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रहका त्याग करके एवं निर्मम तथा शान्त होकर ब्रह्मप्राप्तिका पात्र हो जाता है।

Gita Illustration
ॐ
❧गीता संदेश☙

दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता॥16.5॥

— श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 16, श्लोक 5

❧भावार्थ:☙

दैवी-सम्पत्ति मुक्तिके लिये और आसुरी-सम्पत्ति बन्धनके लिये है। हे पाण्डव तुम दैवी-सम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम्हें शोक (चिन्ता) नहीं करना चाहिये।

Gita Illustration
ॐ
❧गीता संदेश☙

यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते॥17.27॥

— श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 17, श्लोक 27

❧भावार्थ:☙

यज्ञ, तप और दानरूप क्रियामें जो स्थिति (निष्ठा) है, वह भी 'सत्' -- ऐसे कही जाती है और उस परमात्माके निमित्त किया जानेवाला कर्म भी 'सत्' -- ऐसा ही कहा जाता है।

Gita Illustration

✦हमारी यात्रा✦

आरंभ

धर्म और संस्कृति से प्रेरित यात्रा का प्रारंभ

शिक्षा विस्तार

जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सहायता

स्वास्थ्य सहायता

चिकित्सा शिविर और निशुल्क उपचार

सामाजिक सहायता

समाज के हर वर्ग की सेवा

भविष्य का संकल्प

धर्म, समाज और राष्ट्र की सेवा में अग्रसर

आइए, सेवा के इस संकल्प से जुड़ें

आपका समय, आपका सहयोग और आपका प्रयास समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

सहयोग करें

आर्थिक सहयोग से सेवा कार्यों में भागीदार बनें।

सहयोग करें →

हमारे बारे में

हमारे संकल्प, मिशन और यात्रा के बारे में अधिक जानें।

और जानें →

स्वयंसेवी बनें

अपना समय और कौशल समाज सेवा में लगाएं।

स्वयंसेवी बनें →